शायरी

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हमें न मोहब्बत मिली न प्यार ? मिला;
हम को जो भी मिला बेवफा ? यार मिला!
अपनी तो बन गई तमाशा ? ज़िन्दगी;
हर कोई अपने मकसद का तलबगार ? मिला!