शीला के दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष बनने की राह में यह है ‘मुश्किल’, राहुल भी हैं बेखबर

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नई दिल्ली। दिल्ली कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष अजय माकन स्वास्थ्य कारणों के चलते पद छोड़ने वाले हैं, ऐसे में बतौर सीएम (मुख्यमंत्री) दिल्ली पर राज करने वालीं शीला दीक्षित के हाथों में फिर से दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) की कमान आ सकती है। शीला दीक्षित का कद और अनुभव सब पर भारी पड़ता दिख रहा है, लेकिन उनके विरोधी भी अब एक जुट होते जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदलने और संभावित अध्यक्षों के नाम आते ही पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का विरोध शुरू हो गया है। कांग्रेस के एक जिलाध्यक्ष ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि इससे पार्टी कमजोर होगी। जिलाध्यक्ष की पहले से ही शीला दीक्षित से अनबन रही है।

उत्तर पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र के बाबरपुर जिलाध्यक्ष भीष्म शर्मा ने पत्र में लिखा है कि शीला दीक्षित ने मुख्यमंत्री रहते दिल्लीवासियों के लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया था। उनकी दिल्लीवासियों के प्रति सोच की वजह से पार्टी की विधानसभा चुनाव में हार हुई थी। इसी वजह से अब कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है। यहां यह ज्ञात हो कि दीक्षित और शर्मा में बहुत पुरानी अनबन है।

फरवरी 1998 में लोकसभा चुनाव के साथ ही घोंडा विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हुआ था। लोकसभा चुनाव में शीला दीक्षित कांग्रेस प्रत्याशी थीं और भीष्म शर्मा घोंडा से विधायक प्रत्याशी थे। भाजपा नेता लाल बिहारी तिवारी के विधानसभा सीट से इस्तीफा देकर लोकसभा चुनाव लड़ने की वजह से सीट खाली हुई थी।

चुनाव परिणाम के बाद से भी दोनों नेताओं के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा, जो बाद में बढ़ता गया।  ज्ञात हो कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ने वाले हैं। प्रदेश अध्यक्ष के प्रमुख दावेदारों में शीला दीक्षित हैं।

वहीं, पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिस तरह पार्टी में अंदरूनी कलह है, उसे बहुत हद तक पाटने का काम शीला दीक्षित कर सकती हैं। ऐसे में शीला दीक्षित दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए मुफीद हैं। सूत्रों का कहना है कि शीला की मुलाकात राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से हो चुकी है। दिल्ली प्रभारी पीसी चाको के साथ भी बैठक हुई है।

बताया जा रहा है कि माकन के पद छोड़े जाने की बात सामने आने पर आलाकमान ने नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश का काम चाको को दिया है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक भी की थी। उसमें शीला दीक्षित के नाम पर सबकी सहमति थी।