संसद में अनुराग ठाकुर के पीछे बैठेंगी प्रज्ञा ठाकुर, जानिए वजह

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हमीरपुर से बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर भी प्रज्ञा से आगे की सीट पर बैठे दिखाई देंगे.

अनुराग चौथी बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं और पिछली बार उन्हें पार्टी ने चीफ व्हिप बनाया था

लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिली बंपर जीत के बाद अब सरकार गठन की कवायद शुरू हो गई है.

बीजेपी संसदीय दल के नेता चुने गए नरेंद्र मोदी आगामी 30 मई को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे.

इसके बाद जून की शुरुआत में 17वीं लोकसभा का पहला संसद सत्र शुरू होगा.

इस सत्र में 300 ऐसे सांसद हैं जो पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं.

इनमें अभिनेता सनी देओल से लेकर क्रिकेटर गौतम गंभीर, गायक हंसराज हंस और साध्वी प्रज्ञा जैसे नाम शामिल हैं.

इस बार सदन में भोपाल से कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को हराने वाली साध्वी प्रज्ञा ठाकुर भी लोकसभा में नजर आएंगी लेकिन उन्हें पीछे की सीट दी जाएगी.

इसकी वजह है कि प्रज्ञा पहली बार सांसद चुनी गईं है और उनका राजनीतिक करियर भी सिर्फ महीने भर पुराना है.

भोपाल में बीजेपी जॉइन करते ही उन्हें टिकट दिया गया था

और इससे पहले वह किसी दल का हिस्सा नहीं थीं.

वरिष्ठता के आधार पर बीजेपी के कई युवा सांसदों को प्रज्ञा से आगे की सीट दी जाएगी.

मसलन, हमीरपुर से बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर भी उनसे आगे की सीट पर बैठे दिखाई देंगे.

अनुराग चौथी बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं और पिछली बार उन्हें पार्टी ने चीफ व्हिप बनाया था.

इसी तरह नए सांसद के आगे कैबिनेट के जूनियर मंत्रियों को जगह दी जाती है और उसके बाद आगे की पंक्तियों में कैबिनेट मंत्री और प्रधानमंत्री बैठते हैं.

ऐसे तय होती है सांसद की सीट

संसद में चुने गए हर सांसद के लिए एक सीट निर्धारित होती है.

कौन सांसद किस जगह बैठगा, इसके लिए बाकायदा एक फॉर्मूला है ताकि आगे की पक्तियों में बैठने वाले सांसदों की सीट निर्धारित की जा सके.

इस फॉर्मूले के अलावा वरिष्ठता के क्रम में भी सांसदों को सीट दी जाती है,

यह फॉर्मूला पार्टी की ओर से जीती गईं सीटों के आधार पर सदन में बैठने की जगह तय करता है.

पहली बार चुन कर आए किसी सांसद को अगर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है तो उसे पीछे की सीट ही दी जाएगी.

स्पीकर के दाईं ओर आगे की सीटों पर सत्तापक्ष के वरिष्ठ नेता, प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री बैठते हैं तो वहीं बाईं ओर विपक्ष के वरिष्ठ नेता और डिप्टी स्पीकर बैठते हैं.

सबसे आगे की सीटों पर सदन में अपनी-अपनी पार्टी के नेता सदन को जगह दी जाती है

और इसके बाद बाकी दलों के सांसदों के बैठने की व्यवस्था होती है.

सांसद के कार्यकाल और उसकी वरिष्ठता के आधार पर भी सीट निर्धारित की जाती है.