हार गए थे चार दिग्गज ,अजब चुनाव की गजब कहानी: तब लालू ने चलाया था चक्र…

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बात 1991 के आम मध्यावधि चुनाव की है, जब पटना संसदीय क्षेत्र पर पूरे देश की निगाहें टिकी थीं।

तब पटना संसदीय क्षेत्र का विभाजन नहीं हुआ था।

राजनीति के चार बड़े सूरमा यहां से ताल ठोंक रहे थे।

आइके गुजराल, यशवंत सिन्हा, डॉ.सीपी ठाकुर और शैलेंद्रनाथ श्रीवास्तव जैसे बड़े नेता मैदान में थे

और उनके बीच कांटे का मुकाबला था।

यह चुनाव पटना की शांतिप्रिय जनता के लिए बदनुमा दाग साबित हुआ,

जिसमें मतदान के दौरान व्यापक पैमाने पर बूथ लूट और मतपत्रों की छीना झपटी के

कारण चुनाव आयोग ने मतगणना पर रोक लगा दी और बाद में पूरे संसदीय क्षेत्र

का चुनाव रद कर दिया गया।

वह चुनाव राजनीतिक अस्थिरता के माहौल में हो रहा था और तब जनता दल से अलग राजद

अस्तित्व में नहीं आया था।

लालू प्रसाद ने पटना से चुनाव लडऩे के लिए इंद्र कुमार गुजराल को पंजाब से बुलाया था।

आइके गुजराल के अलावा भाजपा से शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव और कांग्रेस से डॉ. सीपी ठाकुर मैदान में थे।

इनके अलावा मैदान में सबसे चर्चित चेहरा यशवंत सिन्हा थे।

चार महीने की चंद्रशेखर सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा के लिए यह प्रतिष्ठा का चुनाव था।

वहीं, लालू प्रसाद हर हाल में यशवंत सिन्हा को संसद पहुंचने से रोकना चाहते थे।

सिन्हा कायस्थ बहुल संसदीय क्षेत्र में वोटरों को गोलंबद करने में सफल हो रहे थे और खुद को स्थानीय

और गुजराल को बाहरी बताकर प्रचार कर रहे थे।

हालांकि, लालू यादव ने अपने उम्मीदवार को बाहरी बताने वाले बयान की सटीक काट खोज ली थी

और गुजराल को गुज्जर कहकर अपनी ही जमात का बता रहे थे।

अपने वोटरों को वे पूरी तरह से समझा चुके थे, लेकिन चुनाव को केवल जनता के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता था।

लालू यादव की सरकार थी और 20 मई, 1991 को हुए मतदान में फोर्स की तैनाती इस तरह से हुई थी कि

वह न बूथों पर दिख रही थी और न ही सड़कों पर।

बहुत कम लोग मतदान के लिए घरों से निकलने की हिम्मत जुटा पाए।

नतीजा जमकर फर्जी मतदान हुए और मतदानकर्मी मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहे।