हिमाचल से दूध के दाम का हिसाब आया है

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एक लीटर का भाव मिलता है 21.50. 2010 में यही रेट था 18 रुपये प्रति लीटर. कोई सरकार सही दाम नहीं देती है.

जब हमने उनसे कहा कि मुझे विस्तार से बताएं, तो उनका दूसरा मैसेज आया.

किसान मार्च पर कार्यक्रम के बाद हिमाचल प्रदेश से एक दर्शक का संदेश आया. अंग्रेज़ी में था.

उन्होंने बताया कि ऊना में हमारे पास दो गायें हैं. पांच लीटर दूध बेचते हैं.

एक लीटर का भाव मिलता है 21.50. 2010 में यही रेट था 18 रुपये प्रति लीटर. कोई सरकार सही दाम नहीं देती है.

जब हमने उनसे कहा कि मुझे विस्तार से बताएं, तो उनका दूसरा मैसेज आया. यह जनाब मार्च में हिस्सा लेने दिल्ली नहीं आए हैं, मगर इस मार्च के बहाने अपने सवालों को लेकर जहां हैं, वहीं मार्च कर रहे हैं.

उनके दिलो-दिमाग पर किसानों का मुद्दा छाया हुआ है.

ना, मज़दूरी, बिजली का भी ख़र्चा होता है. सूखा चारा सौ रुपये कुंतल आता है.

साल में पचास हज़ार लग जाता है, हर महीने पंद्रह हज़ार की लागत आती है.

अगर हम पांच लीटर दूध 23 रुपये प्रति लीटर के भाव से बेचते हैं, तो तीस दिन में हमारी कमाई होती है 15,600 रुपये.

मैं शिमला में रहता हूं, जहां 24 रुपये का आधा लीटर दूध ख़रीदता हूं, वह भी डबल टोन्ड. जबकि अपने घर में 24 रुपये लीटर से कम पर दूध बेचता हूं. यह हमारे साथ मज़ाक़ नहीं, तो और क्या है.

जब मैंने उनसे पूछा कि छह सौ रुपये के लाभ के लिए कोई इतनी मेहनत क्यों करेगा, तो यह जवाब आया है.

“कभी हिसाब ही नहीं किया… और शायद फ़ायदा होता भी न हो… खेती के साथ पशुपालन होता ही है…

यह कहानी सभी छोटे ज़मींदारों की है…

एक गांव में रहने वाला ही समझेगा नहीं, तो यह business लगेगा…”