हिमालय के संरक्षण में निहित है हमारा भविष्य …

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HIMALAYA

आज हिमालय का समूचा क्षेत्र संकट में है। इसका प्रमुख कारण इस पूरे क्षेत्र में विकास के नाम पर
अंधाधुंध बन रहे अनगिनत बांध और पर्यटन के नाम पर हिमालय को चीर कर बनाई जा रही सड़कें
हैं। दुख इस बात का है कि हमारे नीति-नियंता आंख बंद कर इस क्षेत्र में पनबिजली और सड़क
परियोजनाओं को ही विकास का असली प्रतीक मानकर उनको स्वीकृति प्रदान करते रहे हैं, बिना
यह जाने-समझे कि इससे हिमालय को कितना नुकसान उठाना पड़ेगा। पनबिजली परियोजनाओं
और सड़कों के निर्माण के लिए किए जाने वाले विस्फोटों के परिणामस्वरूप पहाड़ तो खंड-खंड
हो ही रहे हैं, वहां रहने वालों के घर भी तबाह हो रहे हैं।

विडंबना यह है कि यह सब उस स्थिति में हो रहा है, जबकि दुनिया के कई विज्ञानियों ने इस बात को
साबित कर दिया है कि बांध पर्यावरण के लिए भीषण खतरा हैं और दुनिया के दूसरे देश अपने यहां से
धीरे-धीरे बांधों को कम करते जा रहे हैं। हालांकि इसके लिए किसी एक सरकार को दोष देना सही
नहीं होगा। वह चाहे संप्रग सरकार रही हो या फिर राजग, दोनों में कोई फर्क नहीं है। विडंबना यह
है कि हमारी सरकारें यह कदापि नहीं सोचतीं-विचारतीं कि हिमालय पूरे देश का दायित्व है। वह देश
का भाल है, गौरव है, स्वाभिमान है, प्राण है। जीवन के सारे आधार यथा-जल, वायु, मृदा हिमालय
की देन हैं। देश की तकरीबन 65 फीसद आबादी का आधार हिमालय ही है। यदि उसी हिमालय
की पारिस्थितिकी प्रभावित होगी, तो हमारा देश प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा।