2019 से पहले राज्यसभा उपसभापति चुनाव में जीत के BJP के लिए मायने

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राज्यसभा उपसभापति चुनाव में एनडीए की ओर से जेडीयू उम्मीदवार हरिवंश ने कांग्रेस प्रत्याशी बीके हरिप्रसाद को मात दी. एनडीए ने बहुमत के जादुई आंकड़े से कम होने के बाद भी जीत के लिए जरूरी सीटों का जुगाड़ कर लिया. ऐसे में भले ही ये चुनाव राज्यसभा के उपाध्यक्ष के पद के लिए रहा हो, लेकिन इसके नतीजे का असर अगले साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी पड़ना स्वाभाविक है.

राज्यसभा उपाध्यक्ष के मतदान के दौरान मौजूदा कुल 244 राज्यसभा सदस्यों में से 232 सांसदों ने हिस्सा लिया. इनमें से 125 सदस्यों ने हरिवंश सिंह को वोट किया. जबकि कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद को 105 वोट मिले. इससे तरह से 20 मतों से जीत हासिल की है. हालांकि दो सदस्य वोटिंग के दौरान गैरहाजिर रहे और बाकी विपक्ष के कई दलों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

राज्यसभा में सत्ताधारी एनडीए बहुमत के आंकड़े से दूर था. जबकि विपक्ष के सभी दलों को मिलाकर बहुमत के लिए पर्याप्त सीटें थी. बावजूद इसके एनडीए की जीत ने मोदी के खिलाफ तथाकथित विपक्षी एकता की पोल खोल दी.

एनडीए के पास राज्यसभा में 95 सदस्य थे. ऐसे में एनडीए ने अपने सहयोगी दलों को साधने के साथ-साथ विपक्ष के कई दलों का समर्थन हासिल करके जीत दर्ज की है. इस जीत के राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं. इस चुनाव का असर आने वाले लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा.

इस चुनाव में जीतना एनडीए के लिए संजीवनी की तरह है. विपक्ष के एआईएडीएमके, बीजेडी और टीआरएस ने एनडीए को समर्थन करके एक बार फिर साबित कर दिया है कि विपक्ष में भले ही हैं, लेकिन मोदी सरकार की जरूरत पर वो साथ हैं.

इससे पहले राष्ट्रपति के चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार को तीनों दलों ने समर्थन किया था. विपक्ष के द्वारा मोदी सरकार के खिलाफ लाए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान एआईएडीएमके ने सरकार के पक्ष में वोटिंग की तो वहीं बीजेडी और टीआरएस ने वोटिंग में हिस्सा ही नहीं लिया.

ये संदेश भी साफ तौर पर गया है कि अगर 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए बहुमत से दूर रह जाता है और कुछ विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत होगी तो ऐसे में विपक्ष के ये दल समर्थन कर सकते हैं.

सत्तापक्ष की तुलना में विपक्ष ताकतकर था, लेकिन सभी दल कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में खड़े नहीं हो सके. हालांकि टीडीपी ने कांग्रेस को समर्थन हासिल किया, लेकिन एआईएडीएमके, टीआरएस और बीजेडी के दिल को वो नहीं जीत पाई.

इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस, पीडीपी ने राज्यसभा उपसभापति चुनाव की वोटिंग से अपने आपको बाहर रखा. इन दलों के सदन के वॉक आउट रहने से साफ संकेत है कि वे विपक्ष में रहते हुए भी कांग्रेस के साथ नहीं है. हालांकि आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह कहते रहे हैं कि कांग्रेस समर्थन चाहिए तो राहुल गांधी को हमारी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से बात करनी करें. राहुल बात नहीं कर सके, जिसके चलते आप का समर्थन नहीं मिला.

उपसभापति चुनाव के नतीजे का संकेत साफ है कि विपक्षी दलों का भरोसा अभी भी कांग्रेस के लिए नहीं बन पा रहा है. कांग्रेस के वही दल खड़े हैं जो 2014 के चुनाव के दौरान साथ थे. ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 2019 के चुनाव में मोदी के खिलाफ विपक्षी दलों को मिलाकर कैसे मुकाबला करेंगे.