NOTA को ‘नो’ कहने लगे झारखंड के वोटर, 1.27% ने ही दबाया नोटा का बटन ….

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झारखंड के वोटर नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) को अब ‘नो’ कहने लगे हैं।

पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस चुनाव में नोटा को कम वोट पड़े हैं।

पिछले लोस चुनाव में इस विकल्प को कुल 1.49 फीसद वोट पड़े थे।

इस बार 1.27 फीसद मतदाताओं ने ही नोटा का बटन दबाया। राज्य की ग्यारह सीटें ऐसी हैं,

जहां पिछले लोकसभा चुनाव की अपेक्षा नोटा को कम वोट मिले हैं।

2014 लोस चुनाव में राज्य की चौदह में से पांच सीटें ऐसी थीं, जहां दो फीसद से अधिक वोट नोटा को पड़े थे।

इस चुनाव में ऐसी सीटों की संख्या घटकर तीन हो गई है।

पिछले चुनाव में खूंटी, सिंहभूम, लोहरदगा, राजमहल तथा दुमका में दो फीसद से अधिक वोट नोटा को पड़े थे।

इस बार खूंटी, सिंहभूम तथा कोडरमा में दो फीसद से अधिक वोट नोटा को पड़े।

हालांकि खूंटी और सिंहभूम में भी नोटा को वोट देनेवाले मतदाताओं की संख्या कम हुई है।

पिछले लोकसभा चुनाव में दोनों सीटों पर क्रमश: 3.34 तथा 3.52 फीसद वोट इस विकल्प को पड़े थे।

इस बार दोनों सीटों पर महज क्रमश: 2.55 तथा 2.76 फीसद वोट ही इसे पड़े।

इस लोकसभा चुनाव में राज्य की चौदह सीटों में से 11 सीटों पर पिछले चुनाव की अपेक्षा नोटा के वोट घट गए।

सिर्फ तीन सीटें ऐसी हैं जहां नोटा के वोट बढ़े हैं।

इनमें चतरा, गिरिडीह तथा गोड्डा शामिल हैं। पलामू, लोहरदगा, रांची, खूंटी, हजारीबाग, कोडरमा, धनबाद,

जमशेदपुर, सिंहभूम, राजमहल तथा दुमका में नोटा के वोट घटे हैं।

एक तरफ, नोटा को पडऩेवाले वोटों की संख्या में कमी आई है, वहीं तीन सीटें ऐसी हैं जहां दो मुख्य प्रतिद्वंदियों

को छोड़कर सभी उम्मीदवारों को नोटा से कम वोट मिले हैं।

इनमें खूंटी, गिरिडीह तथा सिंहभूम शामिल हैं। बाकी सीटों पर अधिसंख्य उम्मीदवारों को नोटा से कम वोट मिले हैं।