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आंध्र प्रदेश में है ऐसे लोकप्रिय मंदिर जहाँ आप शानदार वास्तुकला के दर्शन कर सकते हैं

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आंध्र प्रदेश के हर नुक्कड़ पर आपको एक न एक मंदिर देखने को मिल ही जाएगा। आंध्र प्रदेश के इन पवित्र मंदिरों का न केवल महान धार्मिक महत्व है, बल्कि ये अपनी सदियों पुरानी शानदार वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध हैं। इन रहस्यमय मंदिरों में तिरुपति बालाजी मंदिर आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक देखा जाने वाला मंदिर है। इसके अलावा, बदराचलम सीतारामस्वामी मंदिर, कनक दुर्गा मंदिर, श्रीशैलम मंदिर कुछ ऐसे मंदिर हैं जिन्हें आंध्र प्रदेश के मंदिरों में आपको अवश्य जाना चाहिए। चलिए आपको यहां के कुछ लोकप्रिय मंदिरों के बारे में बताते हैं -

मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर श्रीशैलम

कृष्णा नदी के दक्षिणी तट पर एक मंदिर है, जिसके लिए श्रीशैलम शहर बेहद मशहूर है। मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर, शहर का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे विजयनगर के राजा हरिहर राय ने बनवाया था। पौराणिक कथा के अनुसार, ऋषि ब्रिंगी ने सिर्फ भगवान शिव की पूजा की थी, जिस वजह से पार्वती ने नराज होकर ऋषि ब्रिंगी को खड़े रहने का श्राप दिया था। भगवान शिव ने देवी को समझाने के बाद ऋषि ब्रिंगी को एक तीसरा पैर दे दिया, ताकि वे आराम से खड़े हो सकें। यहां तीन पैरों पर खड़े ऋषि ब्रिंगी की मूर्ति के साथ-साथ नंदी, सहस्रलिंग और नटराज की मूर्तियां भी स्थापित हैं। मंदिरों की दीवारों और स्तंभों को भी सुंदर नक्काशी और मूर्तियों से सजाया गया है। शहर के सबसे खूबसूरत मंदिरों में से एक, यह नल्लामाला पहाड़ियों पर स्थित एक पवित्र संरचना है, जिसे आपको जरूर देखने जाना चाहिए।

अहोबिलम मंदिर अनंतपुर

अहोबिलम एक छोटा सा गांव है, जो भगवान नरसिंह स्वामी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। अहोबिलम मंदिर भगवान लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी को समर्पित है। मंदिर परिसर में आदि लक्ष्मी देवी मंदिर और चेंचू लक्ष्मी देवी के मंदिर भी हैं। पवित्र अहोबिलम मंदिर भगवान लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी के पदचिन्हों पर बनाया गया था जिसकी माप 5 फीट 3 इंच है। ऐसा माना जाता है कि जो कपल्स इस मंदिर में शादी करते हैं, उनके जीवन में खुशहाली रहती है। 108 दिव्य देसमों में से एक होने के कारण, ये मंदिर वो मंदिर है जहां हिरण्यकश्यप को भगवान ने मार दिया था।

लेपाक्षी मंदिर

लेपाक्षी मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में मौजूद है, जिसे वीरभद्र मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। आंध्र प्रदेश का ये मंदिर अपने हेंगिंग पिल्लर के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। हेंगिंग पिल्लर होने की वजह से इसे हेंगिंग टेम्पल के नाम से भी जाना जाता है। यहां आपको माता सीता के पदचिन्ह भी देखने को मिलेंगे। स्थापत्य महत्व के अलावा, स्कंद पुराण के अनुसार मंदिर भगवान शिव का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल भी है। लेपाक्षी एक ऐसा मंदिर है, जो तीर्थयात्रियों के अलावा कला प्रेमियों को भी आकर्षित करता है।

श्री वेंकटेश्वर मंदिर, तिरुपति

आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले के तिरुपति में तिरूमाला की पहाड़ी पर स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर सबसे प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध मंदिर है, जहां साल भर पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की भीड़ देखने को मिलती रहती है। मंदिर के भीतर आप कई तरह के परिसर देखेंगे, मंदिर अपनी विशेष पूजा के लिए जाना जाता है, जो प्रतिदिन सुबह 5:30 बजे से सुबह 6:30 बजे तक आयोजित की जाती है। यह मंदिर भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित है, और 12 वीं शताब्दी से यहां स्थापित है। यह दुनिया के सबसे पवित्र और सबसे धनी मंदिरों में से एक है और यहां लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित करने के लिए आते हैं।

श्रीकालाहस्ती मंदिर चित्तूर

श्रीकालहस्ती मंदिर आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र के चित्तूर जिले में स्थित है। श्रीकालहस्ती का मंदिर उन भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है, जो तिरुपति मंदिर के साथ-साथ इस मंदिर में भी दर्शन करने के लिए आते हैं। ये मंदिर तिरुपति से 36 किमी दूर है। मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जो हिंदुओं के लिए अत्यधिक धार्मिक महत्व रखता है और इसका निर्माण वर्ष 1516 में विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेवराय द्वारा किया गया था। मंदिर का प्रवेश द्वारा बेहद ही अद्भुत दृश्य पेश करता है और इसमें कई पौराणिक चित्रों की जटिल नक्काशी भी की गई है। इस भव्य मंदिर को अक्सर दक्षिण के कैलासा और काशी के रूप में जाना जाता है। मंदिर पांच तत्वों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है और वो है वायु।

रंगनाथ मंदिर, नेल्लोर

पेन्नार नदी के तट पर स्थित, रंगनाथ मंदिर नेल्लोर के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है। मंदिर का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है और इसे क्षेत्र का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है जो इतनी बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करता है। मंदिर अपनी सुंदर वास्तुकला और उत्तम नक्काशी के लिए भी जाना जाता है। इसमें मंदिर परिसर के भीतर विशाल दर्पणों से सजे सोने के सात बर्तन हैं। मंदिर के पीठासीन देवता, भगवान श्री रंगनाथस्वामी की मूर्ति विराजमान है। परिसर के भीतर स्थित अड्डा मंडपम या हॉल को जटिल नक्काशी से सजाया हुआ है।

कनक दुर्गा मंदिर विजयवाड़ा

कनक दुर्गा मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा जिले में स्थित यह अद्भुत वास्तुकला द्रविड़ शैली में निर्मित है। मंदिर कृष्णा नदी के किनारे, इन्राकीलाद्री की पहाड़ियों से घिरा हुआ है। मंदिर का उल्लेख कई पवित्र ग्रंथों और वैदिक साहित्य में भी मिलता है। आंध्र प्रदेश का कनक दुर्गा मंदिर देश में स्थित कई शक्तिपीठों में से एक है। देवी यहां अपने महिषासुरमर्दिनी रूप में स्थापित हैं, साथ ही मारे गए राक्षस राजा महिषासुर की मूर्ती भी यहां मौजूद है। इस मंदिर के प्रति लोगों का विश्वास है कि यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण होती है। इसलिए यहां हर सालों हजारों में भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं।

 

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