• 41 C
    New Delhi
Travel

एडवेंचर की बात करें तो सबसे आगे है केदारकंठ ट्रैक जानें इसके बारे में

( words)

केदारकंठ ट्रैक में आपको हरे-भरे घास के मैदान, बर्फ से ढके रास्ते, आकर्षक गांव, सुगंधित देवदार के जंगल, आसमान छूती चोटियां, शांत नदियां देखने को मिलेंगी। साथ ही गाइड आपको चलते-चलते यहां की कुछ लोकप्रिय पौराणिक कहानियों की भी जानकारी देता रहेगा।

केदारकंठ ट्रैक पैकेज में शामिल

वैसे तो ये हर ऑर्गनाइजर के पैकेज पर निर्भर करता है, लेकिन कुछ जो समान पैकेज देते हैं उनमें से कुछ जैसे -

  • गेस्ट हाउस में आवास/होम स्टे/कैंपिंग
  • यात्रा के दौरान खाना (शाकाहारी)
  • ट्रैकिंग उपकरण जैसे आरामदायक स्लीपिंग बैग, गद्दा, अलग से किचन और डाइनिंग टेंट, क्रैम्पन, बर्तन
  • आवश्यक परमिट और प्रवेश शुल्क
  • ऑक्सीजन सिलेंडर, प्राथमिक चिकित्सा किट और स्ट्रेचर
  • पेशेवर ट्रैक लीडर, गाइड और सहायक कर्मचारी।

केदारकंठ ट्रैक के लिए देहरादून कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग से: देहरादून के जॉली ग्रांट हवाई अड्डे को घरेलू स्तर पर संचालित किया जाता है, जिसमें भारत के प्रमुख मेट्रो शहरों से नियमित उड़ानें आती हैं।

ट्रेन द्वारा: निकटतम रेलवे स्टेशन देहरादून जंक्शन है, जो पूरे भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग से: देहरादून सड़क नेटवर्क के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप या तो देहरादून के लिए ड्राइव कर सकते हैं या दिल्ली या आसपास के किसी अन्य शहर से देहरादून पहुंचने के लिए कैब/टैक्सी किराए पर ले सकते हैं।

केदारकंठ ट्रैक का रुट

दिन 1: सांकरी पहुंचने के बाद रात में यहां आराम करें।

दिन 2: फिर आप जुडा का तालाब होते हुए केदारकंठ बेस कैंप तक ट्रैक करेंगे। फिर आपके लिए कैंप में रहने की सुविधा की जाएगी।

दिन 3: केदारकंठ के आखिर शिखर तक ट्रैक और फिर बेस कैंप में वापस।

दिन 4: सांकरी तक ट्रैक करने के बाद आप यहां आराम करने के लिए रुकेंगे।

दिन 5: फिर इस दिन आप सांकरी से लौटने की तैयारी करेंगे।

केदारकंठ की कहानी 

केदारकंठ को बाल-केदार के नाम से भी जाना जाता है और स्थानीय लोगों के अनुसार यह केदारनाथ का स्थल माना जाता था। ऐसा कहा जाता है कि जब शिव अपने बैल अवतार में केदारकंठ में पांडवों से छिपने के लिए भटक रहे थे, तो स्थानीय निवासियों ने उनकी शांति भंग कर दी। जिस वजह से वो केदारनाथ की ओर चले गए थे। सांकरी के ग्रामीणों का मानना है कि केदारकंठ में स्थापित भगवान शिव का त्रिशूल उनकी रक्षा करता है और हिमालय की नदियों को सूखने नहीं देता।

केदारकंठ ट्रैक ट्रेवल टिप्स

  • केदारकंठ आसान से मध्यम कठिनाई-स्तर का ट्रैक है और इस प्रकार पहली बार ट्रैकिंग करने वाले शौकिया ट्रेकर्स या साहसी लोगों के लिए एक आदर्श ट्रैक है।
  • कोशिश करें कि आपके बैग का वजन 10-12 किलो तक ही रहे।
  • केवल अनुभवी पेशेवरों या प्रमाणित टूर गाइड की मदद से ही इस ट्रैक को करने का विकल्प चुनें।
  • अपने साथ एक अच्छा कैमरा अवश्य रखें क्योंकि बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों और हरी-भरी घाटियों की तस्वीरें क्लिक करने का इससे अच्छा अवसर आपको कही और नहीं मिलने वाला।
  • मानसून के मौसम में ट्रैकिंग करने से आम तौर पर बचना चाहिए, खासकर जो ट्रैकिंग के लिए नए-नए होते हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में लगातार बारिश होती है जिससे बादल फटने, भूस्खलन और रोडब्लॉक की समस्या पैदा हो सकती है।
  • जब तक आपके साथ अनुभवी गाइड न हो, तब तक अकेले इस ट्रैकिंग के लिए न जाएं। हमेशा दो या दो से अधिक के समूह में ही ट्रैकिंग करें।

 

You Might Also Like...

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe now to get notified about Breaking News
from Live4India!