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जानिए,बच्चों के लिए कोवैक्सीन को मिली एक्सपर्ट पैनेल की मंज़ूरी

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Covaxin आधिकारिक तौर पर भारत में बच्चों के लिए उपलब्ध होने वाली कोविड-19 की पहली वैक्सीन बन गई है। अधिकारियों ने कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए अनुमति दे दी है। हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा बनाई गई इस वैक्सीन की देश में टीकाकरण पर एक विशेषज्ञ पैनल, विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने 2-18 वर्ष की आयु के बच्चों में उपयोग के लिए सिफारिश की गई।

एसईसी की सिफारिशों को भारत के औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) को सौंप दिया गया है, जो अंतिम मंजूरी देता है।

आधिकारिक बयान में क्या कहा गया है

एसईसी के बयान में कहा गया: "विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, समिति ने आपातकालीन स्थिति में प्रतिबंधित उपयोग के लिए 2 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के लिए टीके के बाज़ार प्राधिकरण को मंजूरी देने की सिफारिश की।"

बच्चों पर कितनी असरदार होगी कोवैक्सीन?

कोवैक्सीन, जो एक इनएक्टिव वायरस वैक्सीन है, को भारत में वयस्कों के लिए पिछले साल मंजूरी दी गई थी। कोवैक्सीन, SARS-COV-2 वायरस और इसके वैरिएंट्स के खिलाफ 71 प्रतिशत प्रभावी क्षमता प्रदान करती है। यह वैक्सीन अभी भी क्लीनिकल ट्रायल से गुज़र रही है, इसी बीच डेवलपर्स ने कम उम्र के बच्चों पर टीके की प्रभावकारिता का परीक्षण करने के लिए देश भर के चुनिंदा एम्स केंद्रों पर अपने नैदानिक ​​​​परीक्षणों को शुरू किया था। हालांकि, यह अभी तक सामने नहीं आया है कि बच्चों में उपयोग के लिए टीका कब से उपलब्ध होगा।

मुंबई के मसीना हॉस्पिटल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति गिलाड़ा का कहना है, "टीका प्रभावकारिता वयस्कों में जो देखी गई है, उसी के समान ही पाई गई है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि टीके बेहद सुरक्षित हैं। एक सप्ताह में डब्ल्यूएचओ की मंजूरी की उम्मीद है, जो एक स्वागत योग्य प्रगति होगी, इसी के साथ हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई के अंतिम चरण की शुरुआत देख सकते हैं। बच्चों के टीकाकरण के साथ, हम उम्मीद कर सकते हैं कि जनवरी में स्कूल पूरी तरह से फिर खुल सकेंगे। अब हमें सिर्फ वैक्सीन उत्पादन में तेज़ी लाने की ज़रूरत है। वैक्सीन के प्रारंभिक चरण के दौरान वैक्सीन को लेकर लोगों में जैसी हिचक थी, वो बच्चों के मामले में नहीं दिखनी चाहिए क्योंकि भारत में बच्चों के टीकाकरण की बहुत सफल परंपरा रही है।"

आपातकालीन टीकाकरण के लिए दिशानिर्देश

कई देशों में छोटे बच्चों को भी वैक्सीन लगनी शुरू हो गई है। ऐसे में भारत में भी कोविड-19 की तीसरी लहर से बचने के लिए बच्चों को वैक्सीन लगनी ज़रूरी है। कई अनेय देशों की तरह भारत में रहने वाले बच्चों को भी कोविड-19 वैक्सीन की बराबर प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, SEC की सिफारिश कुछ शर्तों के अधीन है।

कोवैक्सीन तीसरी लहर से पहले बच्चों की सुरक्षा में मदद कर सकती है

दूसरी लहर के कोहराम के बाद से ऐसा कहा जा रहा है कि तीसरी लहर के बच्चे सबसे ज़्यादा शिकार हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि तब तक काफी हद तक वयस्कों को वैक्सीन लग चुकी होगी। ऐसे में कोवैक्सीन को मंज़ूरी मिलना एक सराहनीय कदम माना जा रहा है। कोवैक्सीन के अलावा ZyCOV-D भी बच्चों के लिए विकसित की जा रही है। ये एक DNA कोविड-19 वैक्सीन है, जिसे पहले छोटे बच्चों को लगाया जाएगा।

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