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जानिए,Ford के वर्करों ने की नौकरी बचाने की डिमांड, राज्‍य सरकार से लगाई गुहार

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Ford Motors के दक्षिण भारत का प्‍लांट बंद करने के ऐलान से वहां काम कर रहे वर्करों की नौकरी पर संकट आ गया है। इस मामले में उन्‍होंने राज्‍य सरकार से मदद मांगी है। यूनियन के नेताओं ने कहा कि अगर कंपनी ने उत्‍पादन बंद कर दिया तो हमारी नौकरी चली जाएगी। Ford ने चेन्नै में अपने वाहन और इंजन संयोजन इकाई को बंद करने की घोषणा की है।

कई लोगों की नौकरी पर संकट

यूनियन नेताओं ने कहा कि Ford प्लांट के बंद होने से बड़ी संख्या में श्रमिकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कार निर्माता द्वारा नियोजित हैं। कई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (SME) जो कंपनी पर निर्भर थे, उन्हें भी फोर्ड प्लांट के बंद होने के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

2022 तक Ford बंद कर देगी उत्‍पादन

यूनियन के मुताबिक यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि 2022 की दूसरी तिमाही तक फोर्ड कंपनी के चेन्नै में अपने वाहन और इंजन निर्माण संयंत्रों से बाहर निकलने के निर्णय से लगभग 2,600 वर्करों की नौकरी का नुकसान होगा। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने कहा है कि फोर्ड कंपनी के इस कदम से कंपनी के लगभग 170 डीलर्स बुरी तरह प्रभावित होंगे, जिन्होंने संयुक्त रूप से लगभग 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था। FADA ने एक बयान में कहा कि इन 170 डीलरों में करीब 40,000 लोग कार्यरत हैं।

फ्रेंचाइजी को पर्याप्त रूप से मुआवजा दें

फाडा के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने कहा कि फ्रेंचाइजी प्रोटेक्शन एक्ट को भारत सरकार द्वारा तुरंत लागू किया जाना चाहिए क्योंकि इससे यह सुनिश्चित होगा कि कंपनियां अपना संचालन बंद करने से पहले फ्रेंचाइजी को पर्याप्त रूप से मुआवजा दें। उन्होंने कहा कि जहां Ford ने अपने साणंद और चेन्‍नै प्लांटों में 4,000 लोगों को रोजगार दिया था, वहीं डीलरों ने 40,000 लोगों को रोजगार दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि फोर्ड ने 5 महीने पहले कई डीलरों को नियुक्त किया था और इन डीलरों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।

Plant को चलाने के लिए सरकार करे मदद

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक के नेता ओ. पनीरसेल्वम ने भी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से कार निर्माण कंपनी Ford से उत्पन्न समस्या में हस्तक्षेप करने के लिए कहा है। पूर्व CM ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री ने स्टालिन से सीधे कंपनी प्रबंधन और कर्मचारियों से बात करने और संयंत्र के निरंतर संचालन के लिए प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कर्मचारियों की नौकरी ना जाए।

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