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केरल के गुरुवायूर में हैं ऐतिहासिक मंदिर जानें इनके बारे में

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भक्त गुरुवायूर के इन आश्चर्यजनक मंदिरों में न केवल अपने-अपने देवताओं की पूजा करने के लिए शहर आते हैं, बल्कि सुहाने मौसम का भी आनंद लेने के लिए यहां आते हैं। जैसे ही ब्राह्मणों ने कोडुंगल्लूर में बस्तियों का निर्माण शुरू किया, यह स्थान अपने प्राचीन अवशेषों और मुख्य गुरुवायुर मंदिर के लिए प्रसिद्ध हो गया जो आजकल पर्यटकों और यात्रियों के लिए प्रमुख आकर्षण है। गुरुवायूर जैसा ऐतिहासिक शहर अपने आकर्षण और समृद्ध धार्मिक संस्कृति के लिए जाना जाता है। चलिए आपको इस लेख में गुरुवायूर के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताते हैं -

गुरुवायूर मंदिर

गुरुवायूर शहर में स्थित, गुरुवायुर श्री कृष्ण मंदिर केरल के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यह दक्षिण भारत के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है जहां बालकृष्ण अवतार में पीठासीन देवता भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। भगवान की मूर्ति चार हाथों वाली है - एक हाथ में शंख, एक में गदा, एक में चक्र और एक में कमल पकड़े हुए हैं और इसे उन्नीकृष्णन के नाम से भी जाना जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, मंदिर का निर्माण देवताओं, गुरु और वायु देवता द्वारा किया गया था। भगवान उन्नीकृष्णन गुरुवायुर की आश्चर्यजनक मूर्ति पत्थर या धातु के बजाय पडाला अंजनम नामक एक दुर्लभ मिश्रण से बनी है जो पुराने समय में अधिक आम थी। इस मंदिर में भीड़ सबसे ज्यादा जन्माष्टमी के दौरान देखी जाती है। इस मंदिर के दर्शन सुबह 3 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक, तो वही 4:30 बजे से 9:15 बजे तक कर सकते हैं।

मम्मियूर महादेव मंदिर

यह मंदिर दीवारों की सुंदर प्राचीन भित्ति चित्र और ओरिगेमी चित्रों से सुशोभित है। यह गुरुवायुरप्पन मंदिर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव गुरुवयूर मंदिर के असली मालिक थे और लेकिन उन्होंने गुरुवायूर मंदिर में अपनी मूर्ती स्थापित करने की बजाए विष्णु की मूर्ति को स्थापित करने का फैसला किया। इसलिए, प्रत्येक तीर्थयात्री भगवान शिव और भगवान विष्णु के मंदिरों वाले गुरुवायूर मंदिर से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर स्थित इस मंदिर में जाकर अपनी तीर्थ यात्रा पूरी करते हैं। इस मंदिर में भगवान शिव, अयप्पा, विष्णु और गणपति के देवता हैं।

पार्थसारथी मंदिर

गुरुवायूर मंदिर से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित, मंदिर में महाभारत के एक प्रसंग के रूप में भगवान कृष्ण का मंदिर है। मंदिर में रथ के आकार की एक सुंदर संरचना मौजूद है, जहां कृष्ण भगवान रथ के ऊपर अर्जुन को गीता सुनाते हैं। गुरुवायुर मंदिर के इतिहास के अनुसार, देवता को आदि शंकराचार्य द्वारा पूजा जाता था। मंदिर में न केवल भगवान कृष्ण की मूर्ती स्थापित है, बल्कि यहां आपको आदि शंकराचार्य का एक सुंदर मंदिर भी मिलेगा।

थिरु वेंकटचलपति मंदिर

थिरु वेंकटचलपति मंदिर भगवान बालाजी का निवास है, जो भगवान विष्णु का एक अवतार हैं। मंदिर का निर्माण भगवान के तेलुगु भक्तों द्वारा किया गया है। मंदिर परिसर में नवग्रह, लिंग के रूप में शिव, गणेश, और भगवती की मूर्ती स्थापित है। मंदिर सुबह 4:30 बजे से 12:30 बजे तक, तो वही शाम 4:30 बजे रात 8:30 बजे तक खुलता है।

नव मुकुंद मंदिर

जैसा कि नाम से ही पता चलता है, नवयोगी वे संत थे जिन्होंने मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति लाकर भरतपुझा के तट के पास स्थापित की थी। भक्त गुरुवायुर मंदिर के समय के अनुसार देवताओं की पूजा कर सकते हैं। यह मंदिर तिरुनावाया गांव में स्थित है। इस गांव में हर 12 साल में एक बार होने वाले ममनकम के त्यौहार के दौरान योद्धा लड़ते थे। यह अपने विशिष्ट इतिहास और समुद्र तटों की सुंदरता के कारण गुरुवायुर के शीर्ष मंदिरों में से एक है।

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