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Corona Virus Health

कौन-सी कंपनियां कर रही हैं बच्चों के लिए वैक्सीन तैयार?

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कोरोना के लक्षण देखे गए और रिकवरी के बाद MIS-C जैसी बीमारी। अब कुछ परेशान करने वाली रिपोर्ट्स भी आ रही हैं, जो बताती हैं कि आने वाले कुछ महीनों में बच्चों में कोविड-19 के मामलों में और वृद्धि हो सकती है।

फिर भी, संक्रमण की गंभीरता को कम करने में अब तक कोविड-19 वैक्सीन के विश्वसनीय परिणाम दिखने के बावजूद, बच्चों के लिए अभी भी कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। दुनिया के कुछ देशों में बड़े बच्चों को वैक्सीन लगाना शुरू कर दिया है, लेकिन भारत में बच्चे अभी भी वैक्सीन लेने से दूर हैं।

बच्चों पर कोवैक्सिन के उपयोग के लिए क्लिनिकल परीक्षण अभी भारत में शुरू हुए हैं, लेकिन फिर भी इसके लिए एक लंबा इंतज़ार करना पड़ सकता है।

बच्चों के लिए वैक्सीन न सिर्फ उनके भविष्य की रक्षा करने के लिए ज़रूरी है, बल्कि गेश भर में हर्ड इम्यूनिटी के लिए भी महत्वपूर्ण है। तो आइए जानें अभी तक हमें बच्चों के लिए वैक्सीन के बारे में क्या पता है?

क्या बच्चों में भी कोविड का जोखिम बड़ा है?

दूसरी लहर से पहले तक, बच्चों में कोविड-19 के मामले काफी कम थे या रिकवरी के बाद MIS-C जैसी जटिलताओं के बारे में भी सुनने में नहीं आता था। लेकिन दूसरी लहर से पता चला कि वायरस सिर्फ वयस्कों को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी अपना शिकार बना रहा है। इसलिए बच्चों को भी कोविड से सुरक्षित रखने के लिए वैक्सीन की ज़रूरत है।

बच्चों के लिए कोविड-19 वैक्सीन पर कौन सी कंपनियां काम कर रहा हैं?

इस वक्त, अमेरिका, सिंगापुर, जापान, दुबई, इज़राइल और यूरोप के कुछ हिस्सों सहित दुनिया भर के कई देशों में 12 वर्ष से ज़्यादा की उम्र वाले बच्चों को COVID-19 की वैक्सीन लगनी शुरू हो गई है। इसका ​​​​परीक्षण साल 2020 के अंत में ही शुरू हुआ था, जिसमें फाइज़र-बायोनटेक, मॉडर्ना और सिनोफार्म जैसी कंपनियों ने छोटे बच्चों पर टीके की खुराक का परीक्षण करना शुरू किया था, जिससे उन्हें आपात स्थिति में आगे बढ़ने की अनुमति मिली।

इस बीच चीन ने अब अपने घरेलू वैक्सीन निर्माताओं में से एक, सिनोफार्म को 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए वैक्सीन लगाने की अनुमति दे दी है।

भारत में, वर्तमान में, केवल एक वैक्सीन डेवलपर, भारत बायोटेक ने बच्चों पर परीक्षण परीक्षण शुरू किया है। इसके लिए एम्स में बच्चों पर कोरोना वैक्सीन के ट्रायल में मंगलवार यानी 15 जून से 6-12 साल के बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू की जाएगी। पहले दिन करीब 5 से 10 बच्चों को इसमें शामिल किया जाएगा। इससे पहले 12 से 18 साल के बच्चों को कोवाक्सिन की डोज दी जा चुकी है और इस आयुवर्ग का ट्रायल पूरा हो चुका है।फाइज़र भी एक कंपनी है, जो अपनी वैक्सीन लाने के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही है। इसी कंपनी की वैक्सीन बच्चों के लिए भी उपलब्ध हो सकती है। मॉडर्ना के साथ भी इसी तरह की बातचीत होने की बात कही गई है। हालांकि, कई वैक्सीन ट्रायल्स के बावजूद बच्चों के लिए साल के अंत से पहले वैक्सीन उपलब्ध होना मुश्किल है।

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