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"पेगासस जासूसी मामला: नई ‘लिस्ट' में कई चौंकाने वाले नाम से और हंगामा होने के असार, संसद आज भी  स्थाई रूप से चलने के असार नहीं

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पेगासस-जासूसी मामला जो की आज बहोत ही चर्चा में बना हुआ है आज जहाँ देखो बस इसी की बात चल रही है इसके चलते देश की संसद तक ठप हो गई है संसद के 2हफ्ते कुछ भी काम नही हुआ. अब इसकी एक और नई लिस्ट सामने आई है जिसमे कई नामों का ज़िक्र किया गया है, जो कथित नई लिस्ट जारी की गई है उसमें उस महिला के इस्तेमाल किये गए तीन फ़ोन नंबर भी हैं जिसने अप्रैल 2019 में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.
सुप्रीम कोर्ट की एक आंतरिक समिति ने गोगोई को क्लीन-चिट दे दी थी और उनके रिटायर होने के तुरंत बाद सरकार ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया था.
बताया जा रहा है की  इस महिला के नंबरों के साथ-साथ उनके पति और उनके दो भाइयों द्वारा इस्तेमाल किए गए आठ अन्य नंबरों को निगरानी के लिए चुना गया. एक डिजिटल प्लेटफोर्म की माने तो उनके अनुसार, ये वह समय था जब पूर्व सीजेआई के ख़िलाफ़ उन्होंने आरोप लगाए थे.
एक न्यूज़ एजेंसी की माने तो महिला के देवर (पति का भाई) में से एक ने सोमवार एक इन्टरव्यू में बताया कि उसे या उसके परिवार को पता नहीं था कि उनके फ़ोन नंबर निगरानी के संभावित टारगेट थे. उन्होंने कहा कि 'हमने कुछ भी ग़लत नहीं किया'. इसके अतिरिक्त उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की.दिल्ली पुलिस में तैनात महिला के पति और देवर को दिसंबर 2018 में निलंबित कर दिया गया था. हालांकि पुलिस ने कहा था कि उनके निलंबन और महिला के आरोपों के बीच कोई संबंध नहीं है. लेकिन बाद में जून 2019 में दोनों को बहाल कर दिया गया था.
पेगासस जासूसी के संबंध में जारी कथित लिस्ट के मुताबिक़, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा,चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद पटेल के मोबाइल नंबर की भी जासूसी का अंदेशा ज़ाहिर किया गया है.
सोमवार देर शाम कांग्रेस पार्टी ने इस संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी पर आरोप लगाते हुए गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफ़े की मांग की और जासूसी के इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की जांच की मांग उठाई.
ये डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म उन 16 मीडिया संस्थानों में से एक सहयोगी है जिसने 'नंबरों की जासूसी' से जुड़ी ये रिपोर्ट जारी की है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक़, राहुल गांधी के कम से कम पांच क़रीबी दोस्तों और कांग्रेस के अन्य नेताओं के मोबाइल नंबर भी उन संभावित लोगों की सूची में शामिल किए गए हैं जिनकी या तो जासूसी हुई या फिर वे टारगेट थे.
डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 के मध्य में भी राहुल गांधी के दो क़रीबी अलंकार सवाई और सचिन राव के नंबरों की जासूसी हुई.
इन 16 मीडिया संस्थानों में से एक और डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म  के अनुसार, डेटाबेस में एक फ़ोन नंबर की मौजूदगी इस बात की पुष्टि नहीं करती कि संबंधित डिवाइस पर जासूसी की ही गई या फिर की जानी ही थी.
इसके अलावा लीक हुई इस कथित सूची में चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर का नाम भी बताया जा रहा है. बताया जा रहा है की साल 2018 में भी प्रशांत किशोर के फ़ोन पर पेगासस हमला करने का प्रयास किया गया था, लेकिन वो असफल रहा था.
इसके अलावा जिन अन्य दूसरे लोगों के फ़ोन कथित तौर पर निगरानी के लिए चुने गए थे उनमें जगदीप छोखर, वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर गगनदीप कांग और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन के भारत प्रमुख हरि मेनन का नाम भी शामिल है.
50,000 टेलीफ़ोन नंबरों के लीक हुए वैश्विक डेटाबेस सबसे पहले फ़ॉरबिडन स्टोरीज़ और एमनेस्टी इंटरनेशनल को मिले जिसे उन्होंने दुनिया भर के 16 मीडिया संस्थानों के साथ साझा किया.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का भी एक नंबर जो वह कभी इस्तेमाल करते थे, इस कथित सूची में है. पाकिस्तान की तरफ से ये आरोप लगाए जा रहे की भारत सरकार इमरान खान की लोकप्रियता से डर रही है इसलिए इस प्रकार के षड़ीयंत्र रच रह है.

 

.क्या है पेगासस और ये केसे काम करता है:-
ये एक इजरायली कम्पनी एन एस ओ(NSO) द्वारा बनया गया एक स्पाइवेयर है जो की देश की आन्तरिक सुरक्षा और आंतरिक मामलों पर निगरानी के लिए बनाया गया था. जिससे देश और उन्ज्के लोगों का भला हो सके और देश किसी भी खतरे को पहले ही भांप सके. इस कंपनी का कहना ये भी है की ये अपना सोफ्टवेयर सिर्फ सरकारों को ही देती है किस व्यक्ति विशेष को नहीं. ये स्पाइवेयर गोपनीय तरीक़े से फ़ोन, कंप्यूटर या अन्य उपकरणों को अनलॉक कर सकता है, जानकारी एकत्र कर सकता है और उपयोगकर्ता की अनुमति के बिना इसे किसी अन्य डिवाइस में स्थानांतरित कर सकता है. ख़ास बात एक यह भी है की ये एंड्राइड और आई ओ एस दोनों ही सोफ्टवेयर पर काम करता है. जरुरी नही की ये किसी लंक या मैसेजके ज़रिये ही आपके फोन में दाखिल हो बल्कि कोई मिस कॉलया एनी किसी तरीके से ये फोन में प्रवेश क्र सकता है और जब चाहे ये अपना काम खत्म करके वापस बाहर निकल सकता है इसलिए ये और भी ज़्यादा खतरनाक हो जाता है.
हालांकि इसरायली कंपनी ने कहा है कि वो चरमपंथ और अन्य गंभीर अपराधों से लड़ने के लिए केवल सरकारी एजेंसियों को पेगासस बेचती है. पर अभी तो इसकी पूरी हवा बनी हुई है
भारत सहित दुनियाभर में पेगासस स्पाईवेयर एक बार फिर चर्चा में हैं. इसराइल की सर्विलांस कंपनी एनएसओ ग्रुप के सॉफ्टवेयर पेगासस का इस्तेमाल कर कई पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नेताओं, मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के फ़ोन की जासूसी करने का दावा किया जा रहा है.
एक अखबार लिखता है कि कंपनी ने एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं.
इसरायली कंपनी एनएसओ ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल और फ़ॉरबिडेन स्टोरीज़ के डेटा गुमराह करने वाले हैं.
कंपनी का कहना है कि ये डेटा उन नंबरों के नहीं हो सकते हैं जिनकी सरकारों ने निगरानी की है. इसके अलावा एनएसओ ने कहा है कि वो अपने ग्राहकों की खुफ़िया गतिविधियों से वाकिफ़ नहीं है. पेगासस सॉफ़्टवेयर संबंधित फ़ोन पर आने-जाने वाले हर कॉल का ब्योरा जुटाने में सक्षम है.
वहीं कल मानसून सत्र के पहले दिन केंद्रीय दूरसंचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैश्नणव ने लोकसभा में फ़ोन टैपिंग मामले पर सरकार का पक्ष रखा.
एक अन्यअखबार की रिपोर्ट के मुताबिक़, वैष्णव ने कहा, "एक वेब पोर्टल पर कल रात एक अति संवेदनशील रिपोर्ट प्रकाशित की गई जिसमें बढ़ा-चढ़ाकर कई आरोप लगाए गए. ये रिपोर्ट संसद के मॉनसून सत्र के एक दिन पहले प्रकाशित हुई. ये संयोग नहीं हो सकता."
उन्होंने कहा,"इससे पहले भी वॉट्सऐप पर पेगासस के इस्तेमाल को लेकर मिलते-जुलते दावे किए गए हैं. वो बेबुनियाद थे और सभी पार्टियों ने उनका खंडन किया था. 18 जुलाई को प्रकाशित रिपोर्ट भी भारतीय लोकतंत्र और इसकी स्थापित संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश प्रतीत होती है,"
रविवार को इस चर्चित रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दुनिया भर में सैकड़ों पत्रकारों और दूसरे चर्चित लोगों के फ़ोन टैप किए गए हैं. इनमें भारत के कई लोग शामिल हैं. खु़द वैष्णव का नाम भी संभावित लोगों की सूची में है.
बतौर आईटी मंत्री संसद में अपने पहले भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि "अत्यधिक सनसनीखेज़ कहानी" ने कई तरह के संगीन आरोप लगाए हैं, लेकिन उनके पीछे कोई सार नहीं है.
 अब बीजेपी क्या कह रही है?
एक न्यूज़ एजेंसी का कहना है की उसने भाजपा की तरफ से मीनाक्षी लेखी का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया लेकिन हमें उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. हमने बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण से बात की.
उन्होंने कहा, ''मीनाक्षी जी ने ये क्यों बोला इसका जवाब उनके पास ही होगा, लेकिन इस पूरे मामले पर बीजेपी का वही पक्ष है जो आईटी मंत्री ने संसद में कहा है. जिस रिपोर्ट में पुख्ता तथ्यों के आधार पर कुछ ना हो वो लोगों को बहकाने के लिए ही हो सकती है. किसी के फ़ोन की टैपिंग तय क़ानूनों के दायरे में ही होती है और अतीत में भी होती रही है.''
क्या आपकी सरकार ये मान रही है कि पेगासस का इस्तेमाल देश में किया गया है? इस सवाल पर वह कहते हैं कि ''भारत सरकार जो कहेगी हम वही कहेंगे क्योंकि ये सरकार का मुद्दा है पार्टी का नहीं.''
जिस 10 भारतीय नंबरों पर पेगासस के इस्तेमाल की पुष्टि एमनेस्टी की फॉरेंसिक लैब ने की है उस पर बीजेपी का क्या कहना है? इस सवाल पर गोपाल कृष्ण कहते हैं, ''मैंने रिपोर्ट पूरी पढ़ी नहीं है, इसलिए इस पर कुछ नहीं कह सकता.''
इस सब पर बस यही काहा जा सकता है की बात चाहे कुछ भी हो पर विपक्ष को बैठेबिठाए मुद्दा तो जरुर मिल गया है. इसके साथ ही संसद ना चलने की वजह से आम जनता की गाढ़ी कमाई का नुकसां हो रहा है जो वो टेक्स के रूप में सरकार को देती है.

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