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अगर आप उदयपुर जा रहे हैं तो एन बार जरूर जाएं इन मन्दिरों में

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अगर आप उदयपुर घूमने जा रहे हैं, तो क्यों न इन खूबसूरत मंदिरों के भी दर्शन कर लिए जाए? यकीन मानिए इन मंदिरों के दर्शन करने के बाद आपका मन बेहद शांत महसूस करेगा। तो चलिए आपको उन मंदिरों पर एक नजर डालते हैं -

श्री जगदीश मंदिर, उदयपुर

उदयपुर में सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक, श्री जगदीश मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यह तीन मंजिला मंदिर 1651 में महाराणा जगत सिंह द्वारा बनवाया गया था। इंडो-आर्यन स्थापत्य शैली में डिज़ाइन किए गए इस मंदिर में एक पिरामिड शिखर, मंडप और बरामदा है। इस मंदिर का शिखर लगभग 79 फीट लंबा है और इसे आप दूर से आसानी से भी देख सकते हैं। मुख्य मंदिर में काले पत्थर में भगवान विष्णु की चार भुजाओं वाली मूर्ती है और इसके चारों ओर चार छोटे मंदिर भी मौजूद हैं।

एकलिंगजी मंदिर, उदयपुर

भगवान शिव को समर्पित, एकलिंगजी मंदिर उदयपुर जिले के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इसका निर्माण 734 ईस्वी में उदयपुर के शासक महाराणाओं में से एक बप्पा रावल द्वारा किया गया था, जिन्हें श्री एकलिंगजी का प्रतिनिधि माना जाता है। पिरामिडनुमा छत और खूबसूरती से तराशी गई मीनारों के साथ दो मंजिला मंदिर को इसके निर्माण के बाद से कई बार पुनर्निर्मित और विस्तारित किया गया है। मुख्य मंदिर में काले पत्थर में पांच मुखी शिवलिंग है, जिसकी स्थापना महाराणा रायमलजी की गई थी। इस भव्य मंदिर का मुख्य आकर्षण 50 फीट ऊंचा शिखर है।

बोहरा गणेश मंदिर, उदयपुर

बोहरा गणेश मंदिर उदयपुर में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पास स्थित एक लोकप्रिय मंदिर है। भगवान गणेश की खड़ी मूर्ति वाले इस मंदिर का निर्माण 350 साल पहले किया गया था। लोककथाओं के अनुसार, लगभग 70-80 साल पहले, भक्त एक कागज के टुकड़े पर अपनी जरूरतों को लिखकर भगवान गणेश से आर्थिक मदद मांगते थे और चमत्कारिक रूप से, उनकी धन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाता था। यही कारण है कि भगवान गणेश को यहां बोहरा गणेश कहा जाता है, क्योंकि आमतौर पर बोहरा एक कास्ट होती है, जो पैसे उधार देने, व्यवसाय आदि में रहते हैं। बहरहाल, ऐसा कहा जाता है कि सच्ची श्रद्धा वाले भक्त की यहां हर मनोकामना पूर्ण होती है।

महालक्ष्मी मंदिर, उदयपुर

महालक्ष्मी मंदिर धन और समृद्धि की देवी को समर्पित है। देवी को श्रीमाली समाज की पारिवारिक देवी माना जाता है, और मंदिर को मैनेज श्रीमाली जाति संपति ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हालांकि मंदिर में रोजाना कई भक्त आते हैं, लेकिन दिवाली के त्यौहार के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। श्राद्ध पक्ष के आठवें दिन देवी के जन्मदिन पर भी लंबी कतारें देखी जा सकती हैं, क्योंकि यह दिन यहां बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है।

महाकालेश्वर मंदिर, उदयपुर

महाकालेश्वर मंदिर उदयपुर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह फतेह सागर झील के पास, पन्ना विलास के सामने एक शानदार बैकग्रॉउंड के साथ स्थित है। मंदिर भगवान शिव (महाकाल) को समर्पित है और माना जाता है कि यह 900 वर्ष से अधिक पुराना है। लोककथाओं के अनुसार, लोकप्रिय संत और भगवान शिव भक्त गुरु गोरखनाथ ने इस धार्मिक स्थल पर पूजा की थी। इस खूबसूरत नक्काशीदार मंदिर के मुख्य मंदिर में काले पत्थर का शिवलिंग है। मंदिर में प्रतिदिन आरती की जाती है, लेकिन रुद्राभिषेक आरती मुख्य आकर्षण है, जो बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करती है। परिसर के भीतर अन्य देवी-देवताओं को समर्पित कई अन्य छोटे मंदिर भी हैं।

श्री मंशापूर्ण करणी माता, उदयपुर

श्री मंशापूर्ण करणी माता मंदिर करणी माता को समर्पित है, जिन्हें देवी दुर्गा का मानव अवतार माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपने बेटे को चूहे के रूप में पुनर्जीवित किया था, और यह भी कहा जाता है कि उनके परिवार के सभी सदस्य मृत्यु के बाद चूहे बन गए थे और वो चूहों के रूप में यहीं निवास करते हैं। माना जाता है कि मंदिर का निर्माण महाराणा कर्ण सिंह के शासनकाल, 1621-1628 के दौरान हुआ था। हालांकि, 1994 में करणी माता ट्रस्ट द्वारा फिर से शुरु करने से पहले ये काफी वर्षों तक खंडहर में रहा था। ये मंदिर पहाड़ों पर स्थित होने की वजह से, विशेष रूप से सूर्यास्त के समय यहां से नजारा देखने लायक होता है। आप केबल कार से भी मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

 

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