• 41 C
    New Delhi
Travel

इतिहास आज भी याद दिलाता है कोलकाता में मौजूद इन पुरानी इमारतें देखकर

( words)

तो चलिए आज हम आपको इस लेख में कोलकाता की उन्हीं पुरानी इमारतों के बारे में जानकारी देने वाले हैं, जिनके बारे में सुनकर आप आश्चर्य में पड़ने वाले हैं।

राइटर्स बिल्डिंग

इस प्रतिष्ठित इमारत को पहली बार 1780 में जनता के लिए खोला गया था। राइटर्स बिल्डिंग बी.बी.डी. बाग में स्थित है, जिसे पहले डलहौजी स्क्वायर के नाम से जाना जाता था। यह भवन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और राज्य के अन्य अधिकारियों के कार्यालय का घर था। यह अभी राज्य सरकार का सचिवालय भवन है, लेकिन पहले यह ईस्ट इंडिया कंपनी के जूनियर क्लर्क का घर हुआ करता था। अधिकांश महत्वपूर्ण कार्यालय एक नए भवन में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। इमारत के शीर्ष पर मिनर्वा रोमन देवी की मूर्ती स्थापित है।

मार्बल पैलेस

एक सुंदर और एलिगेंट इमारत जिसमें संगमरमर की दीवारें और फर्श हैं, इसे एक बंगाली व्यापारी राजा राजेंद्र मलिक ने बनवाया था। नवशास्त्रीय शैली में निर्मित इमारत में खुला आंगन है, जिसे पारंपरिक बंगाली वास्तुकला में आम रूप से देखा जाता है। आज इसमें कई विक्टोरियन पेंटिंग और भी बहुत कुछ है। भवन में प्रवेश करने से पहले आपको पहले अनुमति लेना जरूरी है, क्योंकि यह एक निजी आवास है।

जोरासांको ठाकुर बारी

टैगोर परिवार का महलनुमा घर आज एक संग्रहालय है। इसी घर में रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म हुआ था। टैगोर परिवार के अधिकांश सदस्य उस समय कलाकारों से लेकर उच्च अधिकारियों, विचारकों, बुद्धिजीवी और लेखक हुआ करते थे। रवींद्रनाथ टैगोर के दूसरे सबसे बड़े भाई, सत्येंद्रनाथ टैगोर असल में सिविल सेवा में शामिल होने वाले पहले भारतीय थे। जबकि, उनके पिता देवेंद्रनाथ टैगोर एक धार्मिक सुधारक और दार्शनिक थे, साथ ही ब्रह्मो धर्म के संस्थापक भी थे।

राजा राम मोहन राय

तीन मंजिला इमारत को राजा राम मोहन राय ने 1815 के आसपास फ्रांसिस मेंडेस से 13,000 रुपये में खरीदा था। उस समय इसे सिमला हाउस कहा जाता था क्योंकि यह जिस क्षेत्र में स्थित है उसे सिमला कहते हैं। रॉय इस घर में कभी नहीं रहे और उनकी मृत्यु के बाद, उनके बेटे और उनके परिवार 1960 के दशक तक इस घर में रहे थे। 1972 में, राम मोहन कॉलेज ने आसन्न संपत्तियों के साथ भवन का अधिग्रहण किया और स्मारक की स्थापना की।

बेलूर मठ

हुगली नदी के पश्चिम तट पर मौजूद बेलूर मठ श्री रामकृष्ण मठ और मिशन के मुख्यालय के रूप में कार्य करता है। 19वीं सदी में स्वामी विवेकानंद द्वारा इस मठ की स्थापना की थी, यहां उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए थे। जिस स्थान पर उन्होंने समाधि ली थी वह आज भी परिसर के भीतर ही है। इसके अलावा इसमें रामकृष्ण, शारदा देवी और स्वामी विवेकानंद का भी मंदिर मौजूद है।

स्टार थियेटर

1883 में निर्मित, यह कोलकाता के पहले व्यावसायिक सिनेमा हॉल में से एक है। आपको बता दें, पहली बंगाली मोशन पिक्चर यहां प्रदर्शित की गई थी और आग लगने के बावजूद, जिसकी वजह से इमारत आधी नष्ट हो गई थी, इसके अधिकांश हिस्सों को कोलकाता नगर निगम द्वारा बहाल कर दिया गया है। इमारत का अंदरूनी इंटीरियर काफी समकालीन है। यहां अभी भी सप्ताह के दो दिन नाटकीय प्रदर्शन किया जाता है।

 

You Might Also Like...

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe now to get notified about Breaking News
from Live4India!