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कोविड-19 वैक्सीन के दो डोज में कितना गैप होना चाहिए ?

( words)

पूरे देश में गुरुवार तक कोविड-19 वैक्सीन के 60.30 करोड़ डोज दिए जा चुके हैं। इनमें 46.73 करोड़ पहले डोज हैं, जबकि करीब 14.6 करोड़ दूसरे डोज हैं। यानी अब भी 31 करोड़ से ज्यादा ऐसे लोग हैं, जिन्हें दूसरा डोज नहीं लगा है।

25 अगस्त तक के आंकड़ों का एनालिसिस बताता है कि करीब 1.8 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें दूसरा डोज लग जाना था। देश में 85%-90% लोगों को कोवीशील्ड लग रही है, इस वजह से इस एनालिसिस में भी कोवीशील्ड के दो डोज के गैप यानी 12 से 16 हफ्ते को ही ध्यान में रखा गया है। दूसरा डोज न लग पाने के कई कारण हैं। कहीं डोज नहीं हैं तो किसी को पहला डोज लगने के बाद इन्फेक्शन हो गया। इस वजह से समय पर दूसरा डोज नहीं लगवा सके।
 

हमने दो डोज के अंतर को लेकर मुंबई की डॉ. माला कानेरिया (कंसल्टेंट, इंफेक्शियस डिजीज डिपार्टमेंट, जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर), मुंबई के डॉ. भारेश डेढ़िया (हेड, क्रिटिकल केयर, पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, खार) और जयपुर के डॉ. प्रवीण कनोजिया (सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस हॉस्पिटल) से बात की। यह समझने की कोशिश की कि अगर दूसरा डोज लगवाने में देरी हो गई है तो क्या करना चाहिए? कितनी देरी चल सकती है? दूसरा डोज न लगवाने पर किस तरह का असर आपके शरीर पर पड़ सकता है?

कोविड-19 वैक्सीन का दूसरा डोज लगवाना क्यों जरूरी है?

  • कोविड-19 वैक्सीन इस समय एक्सपेरिमेंटल स्टेज में है। कोवीशील्ड के दो डोज के बीच गैप को दो बार बदला गया। इस वजह से लोगों में कन्फ्यूजन की स्थिति बनी। आदर्श परिस्थिति यह है कि शेड्यूल को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है और इससे ही वैक्सीन की इफेक्टिवनेस कायम रहती है।
  • कोविड-19 वैक्सीन का पहला डोज लगवाने के कुछ दिन बाद एंटीबॉडी और अन्य सेल मीडिएटेड इम्यून रिस्पॉन्स शुरू होता है। यानी आपका शरीर वायरस के हमले का मुकाबला करने के लिए तैयारी शुरू करता है।
  • चूंकि, वैक्सीन के पहले डोज में वायरस लोड काफी कम रहता है, इस वजह से धीरे-धीरे एंटीबॉडी कम होने लगती हैं। इसके बाद भी एंटीबॉडी मेमोरी सेल्स के तौर पर शरीर में रहती है और दूसरा डोज लगने पर सक्रिय होती हैं, जिसे बूस्टर रिस्पॉन्स कहते हैं। इसी वजह से दो डोज वाली वैक्सीन के दूसरे डोज को बूस्टर डोज भी कहते हैं।
  • पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने मई में एक स्टडी की थी। इसमें पाया गया कि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ एक डोज 30% से 35% ही इफेक्टिव है। इसके मुकाबले डबल डोज 80%-85% इफेक्टिव रहता है। यानी अगर आपने दूसरा डोज नहीं लिया है तो डेल्टा वैरिएंट से इन्फेक्ट होने का खतरा कायम रहता है।

    कोविड-19 वैक्सीन के दो डोज में कितना गैप होना चाहिए?

    13 मई को सरकार ने तय किया था कि कोवीशील्ड के दो डोज के बीच 12-16 हफ्ते का अंतर रखना है। यानी अधिकतम चार महीने के अंतर से कोवीशील्ड के दो डोज लगवा सकते हैं। इसके मुकाबले कोवैक्सिन के दो डोज का अंतर 4-6 हफ्ते है। यानी 42 दिन के भीतर दूसरा डोज लगवाना है।
  • दो डोज वाली वैक्सीन का दूसरा डोज लगवाने में अगर देर होती भी है तो उससे कोई दिक्कत नहीं। आमतौर पर दो हफ्ते का ग्रेस पीरियड मिलता है। यानी अगर देर हो भी गई है तो इससे बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला। बेहतर होगा कि जब भी दूसरा डोज लगवाने का मौका मिले, तब आप लगवा लें। यह आपकी प्रोटेक्शन लेयर को मजबूती देगा।
  • भारत में लग रही तीसरी वैक्सीन स्पुतनिक वी के दो डोज 21 दिन के अंतर से लगाए जा रहे हैं। पर इसे बनाने वाली रशियन कंपनी का कहना है कि दो डोज के बीच 90 से 180 दिन का अंतर भी रखा जाए तो उससे वैक्सीन का इम्यून रिस्पॉन्स प्रभावित नहीं होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में अन्य वैक्सीन के दो डोज का अंतर 180 दिन हो सकता है।
  • भारत में इसके अलावा मॉडर्ना, जॉनसन एंड जॉनसन और जायडस कैडिला की वैक्सीन भी मंजूर की गई है। अभी ये वैक्सीन लगनी शुरू नहीं हुई हैं। मॉडर्ना के दो डोज के बीच 28 दिन का अंतर रखना होता है। जायडस कैडिला की वैक्सीन तीन डोज की है, जिसके दो डोज में चार से छह हफ्ते का गैप रखना है। जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन भारत की इकलौती सिंगल डोज वैक्सीन है।
     

    अगर निर्धारित अंतर में दूसरा डोज लगवा नहीं सके तो क्या होगा?

  • घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ स्टडी बताती हैं कि वैक्सीन के दो डोज का अंतर 6-8 महीने भी रहा तो असर कायम रहता है। आपको भी दूसरा डोज लगवाने में देरी हो गई है तो कोई बात नहीं। आपको दोबारा दोनों डोज लगवाने की जरूरत नहीं है।
  • दूसरे डोज के बाद एंटीबॉडी प्रोडक्शन तेजी से बढ़ता है और इस वजह से कुछ स्टडी हैं जो बताती है कि दोनों डोज लेना जरूरी है। यह डर भी है कि अगर एक डोज लिया तो उससे वायरस के वैक्सीन-रेजिस्टेंट म्यूटेशंस के खिलाफ बहुत ज्यादा प्रभावी नहीं रहता।
  • आमतौर पर इम्यून सिस्टम में बूस्टर रिस्पॉन्स एंटीबॉडी और अन्य इम्यून सेल्स को कई गुना बढ़ा देता है। पहले डोज के मुकाबले बूस्टर डोज से यह रिस्पॉन्स 5-10 गुना हो सकता है। नतीजा यह होता है कि इम्यून रिस्पॉन्स का बेसलाइन भी हायर लेवल पर पहुंच जाता है।
  • अगर इस स्थिति में वायरस से एक्सपोजर होता है तो इम्यून सिस्टम तेजी से काम करता है और वायरस से लड़ने के लिए उसकी ट्रेनिंग मजबूत होती है। आप दूसरा डोज नहीं लगवाते तो आपके इम्यून सिस्टम में बूस्ट नहीं मिलता। वास्तविक वायरस से मुकाबला करने में आपका इम्यून रिस्पॉन्स कमजोर हो सकता है। इन्फेक्शन होने पर वह गंभीर लक्षण या जानलेवा हो सकता है।

    क्या दूसरे डोज में देरी का असर इम्यूनिटी पर पड़ सकता है?

  • हां। अब तक की स्टडी बताती है कि अगर दो डोज का गैप निर्धारित समय से अधिक होता है तो यह आपके लिए गंभीर वायरस इन्फेक्शन का खतरा बन सकता है। दो डोज में देरी से एफिकेसी कितनी कम होती है, यह साफ नहीं है।
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर दो डोज में अधिक गैप रहता है तो एंटीबॉडी रिस्पॉन्स एक समय के बाद कम होने लगता है। बूस्टर डोज सही समय पर नहीं लगा तो यह इम्यून रिस्पॉन्स को कमजोर कर सकता है।

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